माहे रमजान देता है इन्सान बनने की ट्रेनिंग

रोजा अल्लाह के लिए है वही इसका बदला देंगा. रोजा सिर्फ खाने पीने को छोडने का नाम नही है बल्कीरोजा इंसान को हर गलती से रोकता है, जो गलती आमदिनों में भी जायज नहीं है, रोजे की हालत मे जायज चिजोंसे
इसलिए रोका गया है की रोजेदार नाजायज चिजोसे हमेशा दूर रहे, झूठ बोलना, चूगलखोरी करना,बे तुका मजाक करना, झगडा करना, झूठ बोलकर माल बेचना , बदनिगाही करना,..ऐसी बहोत सारी चिजे आम दिनों में भी बूरि है, अगर किसीने रोजेकी हालत में ये किया तो उसने रोजे के मकसद को नही समझा , इसिलिए इन सब गलत चिजोसे रमजान महीने मे सखति से रोका गया है ताकी रमजान महीने के दिन ,रात के ट्रेनिंग से ये सारी बूराईया , अपनी आदत से भी निकल जाये और इन्सान हमेशा हमेशा के लिए सच्चा और ईमानदार इन्सान बनकर जिंदगी गुजारे.

माहे रमजान देता है इन्सान बनने की ट्रेनिंग.

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