बुरखा बंदिपर किसने क्या कहा और क्या किया ?

बुरखा बंदि पर किसने क्या कहा और क्या किया ?

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श्रीलंका में आतंकवादी हमले के बाद, श्रीलंका सरकार ने चेहरे को ढंकने वाली सभी प्रकार की चीजोपर पर प्रतिबंध लगा दिया।

भारत में चुनाव के बीच में इस मुद्दे पर जोरदार बहस चल रही है।


शिवसेना पार्टी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी केपास अपने ‘सामना’ के मुखपत्र में  संपादकीय में बुरखा और नकाबपर बंदी  लगाए जाने की मांग की।


हालांकि, बाद में यह अखबार की व्यक्तिगत भूमिका थी, ऐसे शिवसेना ने स्पष्ट किया ।

भोपाल में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने शिवसेना की मांग का समर्थन किया। 


हालांकि, भाजपा ने इस मांग को खारिज कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता नरसिंह राव ने कहा कि पार्टी को इस तरह के प्रतिबंध की जरूरत नहीं है।


एनडीए के सहकारिता मंत्री रामदास आठवले ने भी मांग का विरोध किया। आठवले ने कहा कि बुरखा पहनना परंपरा का हिस्सा है।


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने  शिवसेना की मांग पर आलोचना की है । 


यह हमारा संविधानिक मौलिक अधिकार है।आप अपने हिंदुत्व को दुसरोंपर थोप नहीं सकते। 


चेहरे पर दाढ़ी मत रखो और आप टोपी भी मत पहेनो ऐसे कल आप कहोंगे, ओवैसी ने ऐसे शब्दों में जवाब दिया है

ओवैसी ने कहा, ‘ये लोग (शिवसेना) पढ़ते नहीं हैं। शिवसेना को पढ़ना चाहिए कि अनुच्छेद 377 के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा।


मैं कैपिटल लेटर में कह रहा हूं, ‘CHOICE’ चॉइस ये हमारा  राज्यघटने में मूलभूत अधिकार है।

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