तो MODI के सामने आत्महत्या करूंगा; BJP CANDIDATE (उम्मीदवार) ने दी धमकी

तो MODI के सामने आत्महत्या करूंगा; BJP CANDIDATE (उम्मीदवार) ने  दी धमकी

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(shillong)शिलाँग: मेघालय में शिलॉन्ग लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार सनबोर शुल्लाई ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी के सामने आत्महत्या करेंगे।घुसपैठियों को देशसे  बाहर निकालने के लिए नागरिकता (सुधारणा) विधेयक को लागू करने का आश्वासन देकर भाजपा लोकसभा चुनाव लड़ रही है , वहीं भाजपा के उम्मीदवार सनबोर शुल्लाई ने इसका विरोध करते हुवे  जान देने की धमकी दी है।
Sanbor Shullai, BJP candidate from Shillong parliamentary seat: As long as I’m alive Citizenship Amendment Bill (CAB) will not be implemented. I will kill myself, I will suicide before Narendra Modi but I will not let CAB to be implemented. #Meghalaya (11/4/19) pic.twitter.com/UyR80lY9hF

— ANI (@ANI) April 12, 2019

(BJP)भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को आश्वासन दिया कि घुसपैठियों को बाहर लाने के लिए नागरिकता (संशोधन)विधेयक लाया जाएगा।इसको बीजेपी के सनबोर शुल्लाई  ने विरोध जताया है। सनबोर शुल्लाई ने कहा, “जबतक ​​मैं जीवित हूंइस बिल को विरोध है। मैं इसके लिए अपनी जान भी दे दूंगी।MODI के सामने ही आत्महत्या करूंगा।”

 नागरिकता सुधार विधेयक क्या है?
1995 के नागरिकता कानून में सुधार करकेपड़ोसी देश बांग्लादेश,पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भारत आए निर्वासितोंको को भारतीय नागरिकता प्रदान की जायेंगी। इस निर्वासितोंमें में हिंदूसिखबौद्धजैनपारसीईसाई शामिल हैं
और इसमें मुस्लिम शामिल नहीं हैं।एक नियमके अनुसार भारतीय नागरीक होने के लिए11 साल तक भारत में रहना जरूरी है।लेकिन ,इस बिल के अनुसार,यदि भारत के पड़ोसी देश का कोई सदस्य छह साल से अधिक समय तक भारत में रहता हैतो उस व्यक्ति को नागरिकता दी जाएगी। 2014 को बीजेपी ने घोषणा पत्र में कहा कि इस बिल को मंजूरी दे दी जायेंगी और फिर सत्तारूढ़ बीजेपी ने बिल को लोकसभा में लाया और इसे मंजूरी दी।
पूर्वोत्तर भारत से बिल को विरोध का कारण 
यदि नागरिकता विधेयक को मंजूरी मिल जाती हैतो पूर्वोत्तर भारत के स्थानीय लोगों की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होगी। ऐसी आशंका व्यक्त कर  कई संगठन इस बिल के विरोध में हैं।
यदि यह विधेयक पारित हो जाता हैतो बांग्लादेश से आये हुवे हिंदू निर्वासितोंकी संख्या बढ़ जाती है और स्थानीय लोगों की संख्या कम हो जाएगी। ऐसा डर उत्तर भारत के नागरिकों में  है।

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